बताया जाता है कि यहां ग्रामीणों ने लोहिया स्वच्छ अभियान और गोबरधन योजना के तहत गांव में गोबर गैस प्लांट लगाया है. इस प्लांट से पाइपलाइन के जरिए पूरे गांव के घरों की रसोई तक गैस पहुंचाई जाती है. इसी गैस पर गांव की महिलाएं रोजाना अपने परिवार का खाना बनाती हैं.
गांव की खास बात यह है कि हर घर के बाहर गोबर गैस का मीटर भी लगाया गया है, जिससे यह पता चलता है कि किस घर में कितना गैस उपयोग हो रहा है. जो ग्रामीण प्लांट को गोबर देते हैं उन्हें गैस मुफ्त मिलती है, जबकि जो लोग गोबर नहीं दे पाते उनसे 25 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से शुल्क लिया जाता है.
गांव की रहने वाली ललिता देवी बताती हैं कि करीब 40 घरों तक इस प्लांट से गैस पहुंच रहा है. पहले गांव में काफी गंदगी रहती थी और हर घर के बाहर गोबर पड़ा रहता था, लेकिन अब उसी गोबर से गैस बन रहा है. दूसरी ग्रामीण महिला चंचला कुमारी ने बताया कि प्रधानमंत्री योजना के तहत चल रहे गोबरधन से गांव के सभी लोग लाभान्वित हो रहे हैं.
गांव के मुखिया ईश्वर मांझी ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से गांव में यह गोबर गैस प्लांट लगाया गया है और पिछले चार वर्षों से सफलतापूर्वक चल रहा है. वर्तमान में करीब 40-50 घरों में पाइपलाइन के माध्यम से गैस को पहुंचाया जा रहा है. इससे गांव की महिलाओं को लकड़ी के धुएं से भी राहत मिली है और गांव भी स्वच्छ बना हुआ है.