जीत, ये सफर और इस सफर की कहानियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देंगी। इस महिला विश्वकप की चैम्पियन देश की बेटियां बनी हैं। पर ये सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जब हमने इस विश्व कप की शुरुआत की तो शुरुआती जीत से लगा सफर बहुत आसान होने वाला है। फिर मुश्किल मैचों में हम जीतते-जीतते हारे। स्थिति यहां तक पहुंची कि न्यूजीलैंड से हार का मतलब होता हम सेमीफाइनल की दौड़ से भी बाहर हो जाते। करो या मरो के इस मैच में टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना और ओपनर प्रतिका रावल ने शतक लगाकर टीम को जीत दिलाई। सिर्फ जीत नहीं हमें सेमीफाइनल में पहुंचाया।
पहले बात उस करो या मरो मुकाबले की...